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Wednesday, August 4, 2021
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भूल जाए एफडी! घर बैठे यहां पैसा लगाकर पाए 4 गुना ज्यादा मुनाफा, फटाफट पैसे होंगे डबल

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नई दिल्ली. 4 महीने की गिरावट के बाद शेयर बाजार  (Stock Marekt) में तेजी का सिलसिला जारी है. सेंसेक्स निचले स्तर से 10 फीसदी की तेजी आ चुकी है. इन रिटर्न को देखकर आम निवेशक भी शेयर बाजार की ओर आकर्षित होने लगते हैं, लेकिन बाजार के जोखिम से उनकी घबराहट बढ़ जाती है. ऐसे में निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड (Best Mutual Funds) में पैसा लगाना अच्छा विकल्प हो सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि म्यूचुअल फंड का पैसा भी बाजार में ही लगता है, लेकिन इसमें ये काम आपके लिए एक जानकार करता है जिससे बाजार का जोखिम कम हो जाता है.

सबसे पहले तो आपको ये तय करना है कि आपके निवेश का मकसद क्या है, आप कितना निवेश कर सकते हैं और कितने समय के लिए इसमें बने रह सकते हैं. अगर आपको साल-दो साल के लिए निवेश करना है, तो उसके लिए अलग म्यूचुअल फंड होंगे. अगर आपको 5, 7, 10 साल या इससे भी ज्यादा समय के लिए निवेश करना है, तो उसके लिए दूसरे म्यूचुअल फंड होंगे.

मतलब साफ है कि सही म्यूचुअल फंड का चुनाव इसी बात पर निर्भर करता है कि आपकी निवेश अवधि क्या है. मिसाल के लिए, अगर आप छोटी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आप डेट फंड या लिक्विड फंड चुन सकते हैं. वहीं अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो फिर आपके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड सही रहेंगे.

एफडी से ज्यादा मिल रहा है रिटर्न- मनीकंट्रोल पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, स्मॉलकैप इक्विटी म्युचूअल फंड्स में निवेशकों को पिछले एक महीने में 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिला है. वहीं, एफडी पर रिटर्न देखे तो सिर्फ 5 फीसदी है.भूल जाए एफडी! घर बैठे यहां पैसा लगाकर पाए 4 गुना ज्यादा मुनाफा, फटाफट पैसे होंगे डबल

अब क्या करें- ऐसे में सिस्‍टेमैटिक इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (एसआईपी ) आपको म्‍यूचुअल फंड स्‍कीमों में नियमित निवेश करने की सहूलियत देता है. जानकार इसे म्‍यूचुअल फंडों में निवेश का सबसे कारगर तरीका बताते हैं. एसआईपी में निवेश शुरू करने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करने की जरूरत होती है. इनके बारे में नीचे बताया गया है. स्‍कीम के प्रकार, उसके प्रदर्शन, पोर्टफोलियो और अपने लक्ष्‍यों के हिसाब से एसआईपी  शुरू करना चाहिए. एसआईपी शुरू करने से पहले केवाईसी को पूरा करना पड़ता है. इसे हमेशा अपडेट रखना चाहिए. निवेशक ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों तरीकों से एसआईपी शुरू कर सकते हैं.

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एसआईपी इंस्‍ट्रक्‍शन के साथ निवेशक एकमुश्‍त निवेश भी कर सकते हैं. -एसआईपी इंस्‍ट्रक्‍शन में कोई बदलाव करने पर दोबारा एसआईपी  को शुरू करना पड़ता है. इसके लिए पूरी प्रक्रिया को दोबारा करने की जरूरत पड़ सकती है. इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.

घर बैठे कर सकते हैं शुरू-एसआईपी को ऑफलाइन शुरू करने का तरीका इसके लिए निवेशक को एक फॉर्म भरने की जरूरत पड़ती है. इसे फंड हाउस से प्राप्‍त किया जा सकता है. फंड हाउस की वेबसाइट से भी इसे डाउनलोड करने का विकल्‍प है. इसमें एक ऑटो डेबिट एनएसीएच मैनडेट को भी भरना पड़ता है.

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इसके अलावा केवाईसी दस्‍तावेजों के साथ कैंसल किए हुए चेक की प्रति को लगाने की जरूरत पड़ती है. इन केवाईसी दस्‍तावेजों में पते और पहचान का प्रमाण शामिल है. ये दस्‍तावेज इनवेस्‍टर सर्विस सेंटर या एएमसी के ब्रांच ऑफ‍िस में जमा किए जा सकते हैं.

ऑनलाइन तरीका ऑनलाइन तरीके से भी एसआईपी शुरू किया जा सकता है. इसके लिए ये विकल्‍प उपलब्‍ध हैं. फंड हाउस की वेबसाइट अपना निजी ब्‍योरा, एसआईपी और बैंक का विवरण दर्ज करके फंड हाउस की वेबसाइट से आई-एसआईपी सुविधा का इस्‍तेमाल करके एसआईपी शुरू किया जा सकता है. डिटेल्‍स भरने पर एक यूआरएन जेनरेट होगा.

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इसके बाद निवेशक को अपने बैंक खाते में लॉग-इन करने की जरूरत पड़ेगी. फिर वे ‘बिलर’ के तौर पर म्‍यूचुअल फंड को जोड़ सकते हैं. एसआईपी इंस्‍ट्रक्‍शन को इनेबल करने के लिए यूआरएन की जरूरत होगी.

डिस्‍ट्रीब्‍यूटर पोर्टल- म्‍यूचुअल फंडों के ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन के लिए कॉरपोरेट डिस्‍ट्रीब्‍यूटर या बैंक जैसे म्‍यूचुअल फंड डिस्‍ट्रीब्‍यूटर पोर्टल उपलब्‍ध कराते हैं. इन पोर्टल के जरिये आसानी से एसआईपी शुरू किया जा सकता है. अगर पोर्टल पर ऑटो डेबिट के लिए बैंक मैनडेट पहले से रजिस्‍टर है तो इसका इस्‍तेमाल एसआईपी के लिए भी हो सकता है.

म्‍यूचुअल फंड ट्रांजेक्‍शन पोर्टल- म्‍यूचुअल फंड के लिए कई तरह के ट्रांजेक्‍शन पोर्टल हैं. इनमें फंड हाउस के रज‍िस्‍ट्रार या एमएफयू (म्‍यूचुअल फंड यूटिलिटी) प्‍लेटफॉर्म की ओर से उपलब्‍ध कराए जाने वाले पोर्टल शामिल हैं. इन प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल करके भी एसआईपी शुरू किया जा सकता है.

जरूरी है एनएवी के बारे में जानना-मान लेते हैं कि म्यूचुअल फंड की एक स्कीम में आप 10 हजार रुपये का निवेश करते हैं. इसकी एनएवी 200 रुपये है. इस स्थिति में आपको 50 यूनिट मिलेंगी. कैसे? 10,000 को 200 से भाग देने पर आपको 50 मिलता है. 10,000/200=50. स्कीम में निवेश करने पर ये यूनिट आपको मिलती हैं. खरीद-फरोख्त में इन्हीं यूनिटों का सबसे ज्यादा महत्व होता है.

अब मान लीजिए कि एक साल में एनएवी 200 रुपये से बढ़कर 250 रुपये हो जाती है और आप इसे बेचने का फैसला करते हैं. तब क्या होगा? अब आपको 12,500 रुपये मिलेंगे. 50 यूनिट को 250 रुपये से गुणा करने पर यह रकम बनेगी. 50*250=12500. लेकिन यहां एक बात पर ध्यान देना होगा. मान लीजिए कि एक फीसदी की दर से एक्जिट लोड लगता है तो आपको अब 12,375 रुपये ही मिलेंगे. इसका फॉर्मूला यह है: 50 यूनिट * 247.50 रुपये एनएवी – एक्जिट लोड.

इस तरह एनएवी म्यूचुअल फंड स्कीम के एसेट का मूल्य है, जिसे प्रति यूनिट देनदारी को घटाकर निकाला जाता है. एनएवी कैश के साथ रखी गई सभी प्रतिभूतियों की कुल कीमत दर्शाता है. जैसा कि आपने देखा कि इसका कैलकुलेशन यूनिट के आधार पर होता है जिसमें सभी देनदारियों को घटा दिया जाता है.

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अगर स्कीम की अधिकांश प्रतिभूतियों के दाम बढ़ते हैं, तो एनएवी भी बढ़ेगी. अगर घटेंगे तो एनएवी घट जाएगी. यानी एनएवी स्कीम की प्रतिभूतियों की कीमतों के साथ बढ़ती-घटती है. प्रतिभूतियों का मतलब इक्विटी और डेट दोनों तरह के साधनों से है. इसमें इक्विटी शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, कॉमर्शियल पेपर इत्यादि शामिल हैं.

कुल मिलाकर स्‍कीम अगर अच्‍छा निवेश करती है तो इसकी एनएवी में बढ़ोतरी होगी. यानी निवेश का मूल्‍य बढ़ जाएगा. अगर स्‍कीम का निवेश घटता है तो उसके एनएवी पर भी असर दिखाई देगा.

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